अलीराजपुर। मध्य प्रदेश के 20 आदिवासी ज़िलों में कार्यरत पंचायत पेसा मोबिलाइजर्स ने 7 जुलाई से 15 दिवसीय सामूहिक अवकाश (हड़ताल) पर जाने का निर्णय लिया है। इस सामूहिक कदम की वजह है मार्च 2025 से अब तक चार माह का लंबित मानदेय और सरकार द्वारा घोषित ₹8000 मासिक मानदेय वृद्धि का अब तक क्रियान्वयन नहीं होना। वही चार माह की यह राशि करीब ₹8.43 करोड़ तक पहुंच गई है, लेकिन शासन स्तर पर अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है।
आपको बतादे की अलीराजपुर जिले सहित संपूर्ण प्रदेश में कार्यरत लगभग 5271 पेसा मोबिलाइज़र जो आदिवासी बहुल पंचायतों में पेसा एक्ट की जमीनी क्रियान्वयन की रीढ़ है। अब खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
पेसा मोबिलाइज़र बोले, घर-परिवार चलाना मुश्किल – जोबट पेसा मोबिलाइज़र ब्लॉक अध्यक्ष संगीता गाडरिया जो खुद एक पेसा मोबिलाइज़र हैं, ने बताया की हमें मात्र ₹4000 मासिक मानदेय मिलता है, वो भी समय पर नहीं। 4 महीने से यह भी नहीं मिला है। हमारे ज़्यादातर साथी बहुत ही साधारण परिवारों से आते हैं और अपने मोबाइल से ही KYC फीडिंग, ग्राम सभा आयोजन, योजनाओं का प्रचार आदि कार्य करते हैं। इंटरनेट रिचार्ज, यात्रा और सभी खर्च हमें खुद वहन करने पड़ते हैं, जबकि कोई तकनीकी सुविधा नहीं दी जाती। सरकार से आग्रह है कि हमारी सुध ली जाए।

मुख्यमंत्री ने किया था मानदेय वृद्धि का ऐलान – 24 अक्टूबर 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर ऐलान किया था कि पेसा मोबिलाइज़र्स का मानदेय ₹4000 से बढ़ाकर ₹8000 प्रति माह किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे “जनजातीय समाज को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम” बताया था। लेकिन जमीनी हालात कुछ और हैं अब जुलाई आ गया है और न तो बढ़ा हुआ मानदेय लागू हुआ न ही पिछले 4 महीनों का बकाया मिला।

ज्ञापन और हड़ताल की घोषणा – 07 जुलाई 2025 को पंचायत पेसा मोबिलाइज़र कर्मचारी संघ अलीराजपुर ने अलीराजपुर, जोबट, सोंडवा, उदयगढ़, कट्ठीवाड़ा जनपद कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 24 जून 2025 को भी स्मरण पत्र सौंपा गया था। 3 दिवस चेतावनी प्रदर्शन व 7 दिवस प्रतीक्षा के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। इसीलिए 07 जुलाई से 15 दिवसीय सामूहिक अवकाश घोषित किया गया है। प्रदेश संगठन ने भी पत्र जारी कर प्रदेश के सभी 20 ज़िलों के पेसा मोबिलाइजर्स को इस आंदोलन में भाग लेने का आह्वान किया है।

राज्य और केंद्र सरकार की भूमिका – पेसा एक्ट के तहत पेसा मोबिलाइजर्स का मानदेय बढ़ाने की घोषणा तो हुई। परंतु अब तक बजट आवंटन और आदेश जारी नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार, केंद्र को 60% और राज्य को 40% वित्तीय हिस्सेदारी निभानी थी। लेकिन राज्य स्तर पर अब तक कोई ठोस निर्देश जारी नहीं हुए हैं।

संघ ने चेताया, अगला कदम अनिश्चितकालीन हड़ताल – यदि 15 दिनों के अंदर सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पंचायत पेसा मोबिलाइज़र कर्मचारी संघ म.प्र. ने स्पष्ट कर दिया है कि अगला कदम अनिश्चितकालीन हड़ताल होगा। इससे आदिवासी अंचलों में ग्राम सभाओं का संचालन और जनकल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
पेसा मोबिलाइजर्स क्या करते हैं? आपको बतादे की पेसा मोबिलाइज़र न केवल पेसा एक्ट की ग्राम सभाओं का संचालन करते हैं। बल्कि पंचायतों की सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार, पात्र हितग्राहियों की पहचान, मुख्यमंत्री संदेश योजना का संचालन, ऑनलाइन KYC व दस्तावेज फीडिंग, ग्रामसभा में प्रस्ताव, छोटे विवादों का समाधान, और स्थानीय जागरूकता अभियानों का क्रियान्वयन भी करते हैं। यह कार्य अधिकांशतः निजी मोबाइल, इंटरनेट, और संसाधनों से किया जाता है।

