दिल का टूट जाना यानी ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक ऐसी ही बीमारी होती है। जिसमें हार्ट का एक भाग अस्थाई रूप से कमजोर हो जाता है। इसकी मांसपेशियों में शिथिलता आ जाती है। इसका दुष्प्रभाव दिल की पम्पिंग क्षमता पर पड़ता है एवं दिल कमजोर हो जाता है। इसे स्ट्रेस कार्डियो मायोपैथी कहते हैं।
क्या है वजह – अक्सर यह बीमारी मानसिक अवसाद की अधिकता की स्थिति में देखी जाती है जैसे – किसी अपने का असामायिक निधन, गंभीर बीमारी, ऑपरेशन का डर, सड़क दुर्घटना, कोई अप्रत्याशित बुरी खबर, फाइनेंशियल सदमा आदि से स्ट्रेस हॉर्मोन की अधिकता से हार्ट अटैक के समान ही स्थिति हो जाती है।
अनदेखी न करें – छाती में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना, पसीने आना, ब्लड प्रेशर का कम हो जाना, जी घबराना, धड़कनों का अनियमित हो जाना, फेफड़ों में पानी भर जाना आदि। ऐसे व्यक्ति जिनमें हेड इंजरी हुई हो या मिर्गी की बीमारी हो उनमें इस बीमारी का जोखिम ज्यादा होता है।
जांच, इलाज, सावधानी – ईसीजी, कार्डियक मार्कर्स बीबी, इकोकार्डियोग्राफी, कोरोनरी एंजियोग्राफी। समय पर लक्षणों को पहचान कर कुछ कार्डियक दवाओं के जरिए इसे ट्रीट किया जाता है।
इसके लक्षणों को जानकर मनोस्थिति पर नियंत्रण रखने का प्रयास करना चाहिए। योग एवं मेडिटेशन के जरिए ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम से बचा जा सकता है। यदि एक बार ऐसा हो चुका है तो मरीज में दुबारा इसके होने का जोखिम अधिक होता है।

