आलीराजपुर। डोल ग्यारस के पावन पर्व पर मंगलवार को बड़ी खट्टाली का चारभुजा धाम आस्था, भक्ति और उल्लास से सराबोर नजर आएगा। ‘हाथी-घोड़ा पालकी… जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष के बीच भगवान श्री चारभुजा नाथ डोले में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। चारभुजा महोत्सव समिति एवं ग्रामवासियों द्वारा आयोजन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। सोमवार को तहसीलदार सुनील राणा ने आयोजन स्थल एवं व्यवस्थाओं का अंतिम निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया।

डोल ग्यारस, जिसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है, चारभुजा धाम बड़ी खट्टाली में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस अवसर पर आलीराजपुर जिले के अलावा झाबुआ, धार, बड़वानी, इंदौर, रतलाम और खरगोन सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र, राजस्थान सहित गुजरात के पंचमहाल क्षेत्र से भी श्रद्धालु भगवान श्री चारभुजा नाथ के दर्शन के लिए बड़ी खट्टाली आते हैं। कई श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर पैदल यात्रा कर धाम पहुंचते हैं।

शताब्दी महोत्सव मना चुका है चारभुजा धाम
क्षेत्र में चारभुजा धाम के नाम से प्रसिद्ध बड़ी खट्टाली के श्री चारभुजा नाथ मंदिर का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व वर्षों पुराना है। वर्ष 2023 में भगवान श्री चारभुजा नाथ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर यहां भव्य शताब्दी महोत्सव मनाया गया था। इसके बाद भी डोल ग्यारस की परंपरा हर वर्ष श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है।

मंगला आरती से शुरू होगा धार्मिक आयोजन
डोल ग्यारस के अवसर पर दिनभर मंदिर में विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। सुबह 6 बजे मंगला आरती के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद प्रभात फेरी निकाली जाएगी। सुबह 9 बजे श्रृंगार आरती के पश्चात आसपास के क्षेत्रों से आने वाली पदयात्राओं का बड़ी खट्टाली में प्रवेश शुरू होगा। दोपहर 11:30 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा। इस दौरान करीब 11 बंदूकों की सलामी भी दी जाएगी। इसके बाद दोपहर 1 बजे राजभोग आरती होगी तथा भगवान श्री चारभुजा नाथ को फलाहारी छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा।

राजस्थान से आए कारीगर तैयार करते हैं विशेष मठड़ी प्रसाद
डोल ग्यारस महोत्सव की एक खास पहचान यहां मिलने वाला विशेष प्रसाद भी है। राजस्थान के प्रसिद्ध सांवरिया सेठ क्षेत्र से आने वाले कारीगर विशेष रूप से मठड़ी, सागर और लड्डू का प्रसाद तैयार करते हैं। विशेष स्वाद वाली मठड़ी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहती है। भगवान के दर्शन के बाद श्रद्धालु यह प्रसाद सशुल्क प्राप्त करते हैं।

कल शाम डोले में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे चारभुजा नाथ
दोपहर 4 बजे उत्थापन आरती होगी। इसके बाद भगवान श्री चारभुजा नाथ डोले में विराजमान होकर भव्य चल समारोह के रूप में नगर भ्रमण पर निकलेंगे। चल समारोह में हाथी, घोड़े और बग्घी शामिल होंगे। बैंड की धुन पर भजनों की प्रस्तुतियां होंगी। नृत्य करते अश्व, भक्ति गीत और रंग-बिरंगी गुलाल चल समारोह की शोभा बढ़ाएंगे। जैसे ही भगवान का डोल नगर भ्रमण पर निकलेगा, ‘आलकी के पालकी… जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी-घोड़ा पालकी…’ के जयघोष से पूरा चारभुजा धाम गूंज उठेगा। इस वर्ष भी पदयात्रियों के बड़ी खट्टाली पहुंचने का सिलसिला रहेगा। आलीराजपुर, नानपुर, आम्बुआ, जोबट सहित आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पैदल यात्रा कर पहुंचेंगे।

हथनी नदी तट पर जलाभिषेक और महाआरती
भव्य चल समारोह गांव के प्रमुख मार्गों से होता हुआ हथनी नदी तट पहुंचेगा। यहां भगवान श्री चारभुजा नाथ का जलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद नदी तट पर भव्य महाआरती का आयोजन होगा। बैंड की धुन, रंगीन आतिशबाजी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से नदी तट का नजारा भक्तिमय हो उठेगा। महाआरती के बाद चल समारोह पुनः चारभुजा मंदिर पहुंचेगा, जहां महाआरती एवं महाप्रसादी का आयोजन होगा। रात्रि में भजन संध्या भी आयोजित की जाएगी।

सर्व समाज संभालेगा श्रद्धालुओं की सेवा व्यवस्था
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए माहेश्वरी समाज, जैन समाज, राठौड़ समाज, ब्राह्मण समाज, सेन समाज, प्रजापत समाज सहित कर्मचारी वर्ग एवं अन्य समाजजन सक्रिय रहेंगे। श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी, सेवा एवं अन्य व्यवस्थाओं में समाजजन सहयोग करेंगे।

सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष नजर
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन एवं पुलिस द्वारा सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। जोबट एसडीओपी आशुतोष पटेल एवं टीआई विजय वास्कले के नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी। मंदिर परिसर, हथनी नदी तट, चल समारोह के मार्ग और अन्य प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहेगा। बाहर से आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है।

डोल ग्यारस के इस भव्य आयोजन को लेकर बड़ी खट्टाली में उत्साह का माहौल है। कल जब भगवान श्री चारभुजा नाथ डोले में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे, तब आस्था, भक्ति, गुलाल और जयघोष से पूरा चारभुजा धाम भक्तिमय नजर आएगा।

