विशाल चौहान। मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच वर्षों से लंबित छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना तथा इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के पूर्ण होने से दोनों राज्यों के रेल संपर्क में ऐतिहासिक बदलाव आने की उम्मीद है। इन दोनों परियोजनाओं के आपस में जुड़ने से पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों को पहली बार व्यापक रेल नेटवर्क से सीधा संपर्क मिलेगा। इसके साथ ही पर्यटन, व्यापार, उद्योग और धार्मिक यात्राओं को भी नई गति मिलेगी।

छोटा उदयपुर से धार तक बनेगा नया रेल कॉरिडोर
आलीराजपुर जिले के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना के तहत गुजरात के छोटा उदयपुर से रेल लाइन जोबट और बोरी होते हुए धार जिले के टांडा तक पहुंचेगी। वर्तमान में वडोदरा से छोटा उदयपुर होते हुए जोबट तक ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। वहीं जोबट से आगे बोरी रोड और टांडा तक रेल लाइन बिछाने तथा रेलवे स्टेशनों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
तिरला बनेगा दोनों परियोजनाओं का अहम जंक्शन
धार जिले में पहुंचने के बाद यह रेल लाइन तिरला के समीप इंदौर-दाहोद रेल परियोजना से जुड़ेगी। भविष्य में तिरला दोनों रेल परियोजनाओं का महत्वपूर्ण जंक्शन बन सकता है। वर्तमान में तिरला से टांडा और आलीराजपुर की ओर लगभग 60 किलोमीटर से कम हिस्से का निर्माण कार्य शेष है।

इंदौर-दाहोद रेल लाइन से जुड़ेगा आदिवासी क्षेत्र
इंदौर-दाहोद रेल परियोजना गुजरात के दाहोद से शुरू होकर मध्यप्रदेश के झाबुआ, सरदारपुर, तिरला, धार और पीथमपुर होते हुए इंदौर तक पहुंचेगी। इससे पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों को सीधे इंदौर और गुजरात से रेल संपर्क मिलेगा। परियोजना पूरी होने पर यात्रियों के साथ-साथ उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
अंतिम चरण में पहुंचा टीही टनल का निर्माण
इंदौर-दाहोद रेल परियोजना का कार्य वर्ष 2008 में शुरू हुआ था, लेकिन विभिन्न कारणों से इसकी गति प्रभावित होती रही। परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती मानी जाने वाली टीही टनल का निर्माण अब अंतिम चरण में है। इसके पूरा होते ही शेष कार्यों में तेजी आने की संभावना है।

इंदौर-वडोदरा की दूरी होगी करीब 120 किलोमीटर कम
वर्तमान में इंदौर से वडोदरा जाने के लिए यात्रियों को उज्जैन, रतलाम, दाहोद और गोधरा होकर लंबा मार्ग तय करना पड़ता है। दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद इंदौर और वडोदरा के बीच रेल दूरी लगभग 430 किलोमीटर से घटकर 310 किलोमीटर रह जाएगी। इससे करीब 120 किलोमीटर की दूरी कम होगी और यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। इसका लाभ मुंबई जाने वाले यात्रियों को भी मिलेगा।
पर्यटन और धार्मिक यात्रा को मिलेगा बढ़ावा
नई रेल कनेक्टिविटी से मध्यप्रदेश और गुजरात के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंचना अधिक आसान होगा। यात्री उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, धार का मांडव, जहाज महल, ऐतिहासिक भोजशाला, बाघ की गुफाएं, डायनासोर पार्क तथा आलीराजपुर की आदिवासी संस्कृति और विश्व प्रसिद्ध भगोरिया हाट तक सुविधाजनक यात्रा कर सकेंगे। वहीं गुजरात में पावागढ़ स्थित मां कालिका मंदिर और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक भी रेल यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी।

सिंहस्थ से पहले पूरी हुईं तो मिलेगा विशेष लाभ
यदि दोनों रेल परियोजनाएं आगामी सिंहस्थ से पहले पूरी हो जाती हैं, तो गुजरात और महाराष्ट्र से आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सुविधा मिलेगी। वे कम समय में इंदौर पहुंचकर उज्जैन, ओंकारेश्वर और प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक आसानी से यात्रा कर सकेंगे।
उद्योग और व्यापार को मिलेगी नई दिशा
इन परियोजनाओं से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र सहित मालवा और गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल परिवहन अधिक तेज और किफायती होगा। इससे उद्योगों, व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की संभावना है।
विकास की नई संभावनाओं का मार्ग
वर्षों से प्रतीक्षित इन दोनों रेल परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद धार, आलीराजपुर, झाबुआ सहित आसपास के आदिवासी क्षेत्रों को देश के प्रमुख रेल नेटवर्क से बेहतर संपर्क मिलेगा। इससे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी और मध्यप्रदेश तथा गुजरात के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध पहले से अधिक मजबूत होंगे।

