अलीराजपुर। मध्यप्रदेश सरकार की सुपर 100 योजना की शुरुआत वर्ष 2013-14 में इस उद्देश्य से की गई थी कि ग्रामीण एवं पिछड़े अंचलों की प्रतिभाओं को निखारकर उन्हें उच्च शिक्षा और करियर निर्माण का अवसर दिया जा सके। प्रारंभिक वर्षों में चयन प्रक्रिया जिला मेरिट पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत प्रत्येक जिले से चार टॉपर विद्यार्थियों को सीधे भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय एवं इंदौर के मल्हार आश्रम में प्रवेश दिया जाता था। जहां IIT और NEET की नि:शुल्क कोचिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थीं।
इसी प्रणाली के तहत अलीराजपुर जिले से भी चार विद्यार्थियों का चयन हुआ था। आज उन्हीं में से कई डॉक्टर और इंजीनियर बनकर प्रदेश की सेवा कर रहे हैं। सुपर 100 योजना से सफल हुए विद्यार्थी अलीराजपुर जिले के उदाहरण : डॉ. शिवानी चौहान (मेडिकल ऑफिसर, खट्टाली) डॉ. प्रियंका मंडल (मेडिकल ऑफिसर, जिला अस्पताल अलीराजपुर) कमलेश गेहलोत (सहायक अभियंता, ऊर्जा विभाग, म.प्र. शासन) डॉ. हंसा मौर्य (MBBS, बीएमसी सागर) डॉ. पूजा बामनिया (MBBS, बीएमसी सागर) है।

हालांकि वर्तमान में योजना की चयन प्रणाली पूरी तरह से एंट्रेंस टेस्ट पर आधारित कर दी गई है। नतीजन झाबुआ और अलीराजपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों से अब कोई भी विद्यार्थी चयनित नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण अंचलों के छात्रों को न तो शहरी बच्चों जैसी कोचिंग सुविधाएं मिलती हैं और न ही पर्याप्त संसाधन व मार्गदर्शन, ऐसे में उनके लिए प्रवेश परीक्षा एक अतिरिक्त बाधा बन गई है।
सफल छात्र कमलेश गेहलोत का कहना है शासन की सुपर 100 योजना ने हमें बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का अवसर दिया है। इसके लिए हम सभी शासन के आभारी हैं। उनका मानना है कि यदि पहले की तरह जिला मेरिट के आधार पर चयन की प्रणाली जारी रहती, तो और भी अनेक ग्रामीण प्रतिभाशाली छात्र को डॉक्टर और इंजीनियर बनकर प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिलता,वर्तमान में केवल एंट्रेंस परीक्षा पर आधारित प्रणाली के कारण कई प्रतिभाशाली बच्चे योजना के लाभ से वंचित हो जाते हैं।
विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का भी मानना है कि यदि पहले की तरह 10वीं कक्षा की जिला मेरिट सूची के आधार पर चयन किया जाए, तो निश्चित ही ग्रामीण प्रतिभाएं उच्च शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में सफल हो सकेंगी।

