अलीराजपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर जब हम गुरुजनों को नमन करते हैं, तो यह याद रखना आवश्यक है कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं होता, बल्कि समाज और देश के भविष्य का निर्माता भी होता है। सांदीपनि स्कूल खंडाला के प्रभारी प्राचार्य कुलदीप भाटी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।
भाटी वर्ष 1998 से निरंतर शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। दो दशक से अधिक की सेवाओं में उन्होंने अनेक बालिकाओं को शिक्षा के माध्यम से सशक्त किया। आज उनकी पढ़ाई हुई छात्राएँ न सिर्फ शासकीय सेवाओं में हैं, बल्कि समाज में अपनी भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान में वे सांदीपनि स्कूल खंडाला में कार्यरत हैं और यहां बच्चों की शिक्षा को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने के लिए लगातार नवाचार कर रहे हैं।

शिक्षा में नवाचार, बच्चों की सुविधा सर्वोपरि : गांव के बच्चों की समस्याओं को समझते हुए उन्होंने विद्यालय परिसर में नि:शुल्क फोटोकॉपी सेंटर और बैंक खाते खुलवाने की व्यवस्था कराई। इससे बच्चों का समय और पैसा दोनों बचे, साथ ही वे शासकीय योजनाओं का लाभ भी समय पर पा सकें। पर्यावरण संरक्षण के लिए भाटी स्वयं साइकिल का उपयोग करते हैं और बच्चों को भी हरित अभियान से जोड़ते हैं। विद्यालय परिसर में बागवानी और वृक्षारोपण ने बच्चों को प्रकृति के महत्व से परिचित कराया।
चुनौतियों का समाधान, बच्चों के भविष्य के लिए अतिरिक्त प्रयास : गांव में बिजली कटौती की समस्या को देखते हुए उन्होंने विद्यालय में एक्स्ट्रा क्लास की व्यवस्था की। खुद के व्यय पर बच्चों को कभी नाश्ता, तो कभी भोजन उपलब्ध कराया। चार्जिंग बल्ब की व्यवस्था से बच्चों के लिए रात में पढ़ाई संभव हुई। इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि पिछले दो वर्षों से विद्यालय का कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा।
कोई बच्चा छूटे नहीं, यही संकल्प : यदि किसी छात्र ने पढ़ाई बीच में छोड़ी, तो भाटी ने स्वयं उसके परिवार से मिलकर उसे दोबारा विद्यालय से जोड़ने का प्रयास किया। साथ ही, आधुनिक शिक्षा से बच्चों को जोड़ने के लिए कंप्यूटर क्लास भी शुरू की। उनका मानना है कि जिले के बच्चे बेहद होशियार हैं, जरूरत है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन की।
आज के बच्चे ही कल का भविष्य – भाटी कहते हैं… मुझे गर्व है कि मैं शिक्षक हूं और समाज व देश के निर्माण में अपनी भूमिका निभा रहा हूं। आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं, इसलिए उन्हें सही शिक्षा और संस्कार देना हम सबकी जिम्मेदारी है। शिक्षक दिवस पर उन्होंने जिले के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि एक शिक्षक का योगदान कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसकी सोच और प्रेरणा से ही समाज की दिशा तय होती है।

