Jhabua Collector Neha Meena Car Accident : झाबुआ। सोमवार सुबह झाबुआ में जो हुआ, वह एक साधारण सड़क दुर्घटना नहीं.. यह उस बेलगाम माफिया तंत्र की चेतावनी थी जो अब प्रशासनिक अफसरों की जान तक पर बन आया है। जिला कलेक्टर नेहा मीना, जो सुबह 10:30 बजे सरकारी वाहन से कलेक्ट्रेट जा रही थी। अचानक एक तेज रफ्तार डंपर ने उनके वाहन में सीधे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन डिवाइडर पर चढ़ गया और बिजली के खंभे से जा भिड़ा। गनीमत रही कि वाहन में सवार कलेक्टर, उनके ड्राइवर वीरेंद्र और गार्ड तोलसिंह बाल-बाल बच गए। यह हादसा उनके सरकारी निवास के सामने ही हुआ। यानी सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां वहीं उड़ गईं जहां सबसे ज्यादा चौकसी होनी चाहिए थी।
डंपर मालिक शांतिलाल… एक परिचित नाम, एक आदतन अपराधी – पुलिस जांच में सामने आया कि इस डंपर (एमपी 13 एच 1089) का मालिक शांतिलाल बसेर है। राणापुर का रहने वाला और कुख्यात रेत माफिया। उसके खिलाफ पहले से राणापुर थाने में गंभीर धाराओं में केस दर्ज है 323, 325, 34, 504, 294, 353, 506 IPC और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी। ऐसे व्यक्ति के डंपर को सरकारी वाहन से भिड़ने तक छूट कैसे मिली? शांतिलाल के पास 12 डंपर हैं, जिनसे आलीराजपुर से बिना रॉयल्टी के रेत उठाई जाती है और झाबुआ, रतलाम, धार तक सप्लाई की जाती है। यह सारा काम प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है.. और कोई जिम्मेदार नहीं!
डंपर चालक ने कबूला… अवैध रेत लेकर लौटा था – डंपर चालक रामसिंह, निवासी जुवारी, थाना उदयगढ़ ने स्वीकार किया कि वह अवैध रेत चांदपुर, अलीराजपुर से लाकर कल्याणपुरा में मनोज प्रजापत के घर खाली करके लौट रहा था। उसके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं था, न खनिज पास, न परिवहन की अनुमति फिर भी यह डंपर झाबुआ शहर में बेरोकटोक दौड़ रहा था।
खनिज अधिकारी की ढिठाई: डंपर खाली था, मेरी जिम्मेदारी नही – जब खनिज अधिकारी जुवानसिंह भिड़े से इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने निर्लज्जता से जवाब दिया.. डंपर खाली था, मैं जिम्मेदार नहीं हूं। यह RTO और ट्रैफिक पुलिस का मामला है। क्या प्रशासन का कोई विभाग भी यह मानता है कि रेत खाली हो जाने के बाद वाहन अपराधमुक्त हो जाता है?
हादसे के बाद भी ड्यूटी पर डटी रहीं कलेक्टर – इस खतरनाक हादसे के बावजूद कलेक्टर नेहा मीना ने हिम्मत और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर तयशुदा बैठक ली, जिसमें 15 अगस्त की तैयारियों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा ये बाबा महाकाल की कृपा है कि हम सुरक्षित हैं। लेकिन सवाल ये है.. क्या अगली बार भी सिर्फ कृपा से बचा जा सकेगा?
जनप्रतिनिधि बोले.. अब और देरी नहीं चलेगी – झाबुआ विधायक डॉ विक्रांत भूरिया ने हादसे को बेहद गंभीर बताया और कहा कि वह झाबुआ बायपास की मांग विधानसभा में दो बार उठा चुके है। लेकिन पीडब्ल्यूडी और प्रशासन लगातार चुप हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह घटना साबित करती है कि झाबुआ की जनता और अफसर अब सड़क पर सुरक्षित नहीं हैं।
क्या यह सिस्टम की नाकामी नहीं है? – जब रेत माफिया के वाहन कलेक्टर तक को नहीं बख्शते, जब खनिज अधिकारी पल्ला झाड़ते हैं, जब बिना वैध कागजात के वाहन शहर में धड़ल्ले से घूमते है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या भरोसा? यह सिर्फ एक हादसा नहीं सिस्टम के मुँह पर तमाचा है। अब सवाल यह है.. क्या शांतिलाल जैसे माफिया पर सख्त कार्रवाई होगी? क्या RTO, ट्रैफिक और खनिज विभाग के अफसरों से जवाब लिया जाएगा? या फिर ये घटना भी फाइलों में दफन हो जाएगी?

