भारत के पहले अंडरवाटर म्यूजियम बनाने की योजना को मिली गति
भारतीय नौसेना का सेवामुक्त लैंडिंग शिप आईएनएस गूलदार 15 मार्च को विजयदुर्ग बंदरगाह पर पहुंच गया। इस ऐतिहासिक जहाज की सुरक्षित डॉकिंग के लिए UM मरीन ने महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम को विशेष तकनीकी और लॉजिस्टिक सेवाएं प्रदान कीं। यह कदम भारत के पहले अंडरवाटर म्यूजियम की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो देश की सामुद्रिक विरासत को संरक्षित करने और वैश्विक पर्यटन को बढ़ावा देने का कार्य करेगा।

सुनियोजित डॉकिंग एवं विशेषज्ञों की भूमिका
इस अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करने में UM ग्रुप के निदेशक मुनिर करलेकर, ऑपरेशंस हेड मिलिंद बनप और निदेशक सहल करलेकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जहाज को समुद्र से विजयदुर्ग खाड़ी तक लाने के लिए स्थानीय पायलट की सहायता ली गई, जबकि स्थानीय एजेंट शब्बीर धोपावकर ने मूरिंग टीम का प्रबंधन किया।
बरथिंग की विस्तृत योजना मिलिंद बनप और मुनिर करलेकर द्वारा तैयार की गई, जिसे पोर्ट पायलट स्टीफन फर्नांडिस ने सफलता के साथ लागू किया। इस प्रक्रिया में टगबोट और तटीय दल के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित किया गया, जिससे INS गूलदार को सुरक्षित रूप से जेटी पर खड़ा किया जा सका। इस ऑपरेशन के तहत टगबोट शिवाली 2 ने करवार पोर्ट से विजयदुर्ग तक जहाज को टो किया, जबकि अंबा शिपिंग की टगबोट अनिशा ने अंतिम डॉकिंग प्रक्रिया में सहायता की। इस संपूर्ण प्रक्रिया की देखरेख MTDC कोकण के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी दीपक माने द्वारा की गई।

भारत का पहला अंडरवाटर म्यूजियम – ऐतिहासिक पहल
INS गूलदार सिर्फ एक सेवामुक्त नौसैनिक जहाज नहीं, बल्कि भारत की समुद्री विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। MTDC की योजना इसे भारत के पहले अंडरवाटर म्यूजियम में बदलने की है, जिसे वेंगुर्ला के निवाती रॉक्स के पास स्थापित किया जाएगा। यह म्यूजियम भारतीय नौसेना के गौरवशाली इतिहास और समुद्री शक्ति को प्रदर्शित करेगा और वैश्विक स्तर पर भारत के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड जैसे देशों में पहले से अंडरवाटर म्यूजियम मौजूद हैं। लेकिन भारत में यह अपनी तरह की पहली ऐतिहासिक पहल होगी।

यह परियोजना न केवल सांस्कृतिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि डाइविंग, समुद्री अध्ययन और अनुसंधान के लिए भी एक अनूठा केंद्र बनेगी। जब तक इस परियोजना को मूर्त रूप नहीं दिया जाता, तब तक INS गूलदार विजयदुर्ग जेटी पर ही रहेगा। जहां इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहरी पर्यटकों के आने की संभावना है। भारत की समुद्री विरासत को संजोने और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।
जाने पूर्व आईएनएस गुलदार के बारे में –
- आईएनएस गुलदार का निर्माण पोलैंड में किया गया था और इसे 30 दिसंबर 1985 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
- इसने 1995 तक मुख्य रूप से पूर्वी नौसेना कमान में तथा बाद में 12 जनवरी 2024 को अपनी सेवा समाप्ति तक अंडमान और निकोबार कमान में अपनी सेवाएं दीं।
- अपनी 39 वर्षों की सेवा के दौरान, जहाज ने ऑपरेशन अमन और ऑपरेशन पवन सहित अनेक अभियानों में भाग लिया तथा 490 से अधिक समुद्रतटीय अभियानों को सफलतापूर्वक संचालित किया।
- भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त जहाज आईएनएस गुलदार को महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (एमटीडीसी) द्वारा भारत के पहले पानी के नीचे स्थित संग्रहालय में परिवर्तित किया जाएगा।

