इंदौर। आर्मी पब्लिक स्कूल, महू में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत “साइबर सुरक्षा” विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में राष्ट्रीय स्तर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रो. गौरव रावल को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने शिक्षकों को साइबर खतरों और छात्रों को इनसे सुरक्षित रखने के सरल उपायों पर जानकारी दी।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्राचार्या सुश्री गार्गी विद्यार्थी एवं उप प्राचार्य श्री एस.के. चौधरी ने प्रो. रावल का स्वागत किया। इस सत्र में लगभग 100 शिक्षकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य शिक्षकों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 के अंतर्गत विभिन्न साइबर अपराधों की जानकारी देना और उनसे सुरक्षा के उपाय बताना था।
प्रो. रावल द्वारा अभिभावकों के लिए सुझाए गए सुझाव:
- बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग के खतरों (जैसे साइबरबुलिंग, धोखाधड़ी, अनुचित संवाद) के बारे में खुलकर समझाएं।
- उन्हें विश्वास दिलाएं कि वे किसी भी परेशानी की जानकारी आपसे साझा कर सकते हैं।
- मोबाइल या अन्य डिवाइस में पैरेंटल कंट्रोल सक्रिय करें।
- गेमिंग का समय तय करें ताकि लत से बचा जा सके।
- केवल उम्र के अनुसार ही गेम खेलने की अनुमति दें (जैसे PEGI/ESRB रेटिंग देखें)।
- किसी गेम को अनुमति देने से पहले खुद उसे खेलें या जानकारी प्राप्त करें।
- बच्चों को व्यक्तिगत जानकारी (नाम, पता, स्कूल, फोटो) साझा न करने की शिक्षा दें।
- यूजरनेम ऐसा रखें जिससे वास्तविक पहचान उजागर न हो।
- चैटिंग या वॉयस चैट जैसे फीचर्स पर निगरानी रखें और अनावश्यक सुविधाएं बंद करें।
- फ्री गिफ्ट, चीट कोड या अज्ञात लिंक पर क्लिक करने से बचाएं।

प्रो. रावल ने शिक्षकों को आईटी एक्ट की धारा 66-E की जानकारी देते हुए बताया कि साइबर अपराधों से निपटने में यह कितनी प्रभावी है। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गोपनीयता एवं सुरक्षा को लेकर भी शिक्षकों को जागरूक किया।
उन्होंने सुझाव दिया कि सभी शिक्षक अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल (जैसे फेसबुक, ट्विटर आदि) के पासवर्ड मजबूत और गोपनीय रखें। उन्होंने ईमेल पासवर्ड की सुरक्षा, स्पाइंग ऐप्स, तथा की-लॉगर की पहचान और उससे बचाव के तरीके भी साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में समन्वयक डॉ. प्रमोद श्रीवास ने सभी को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी एवं आभार प्रकट किया।


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मुलताई में कुछ बैंक, कुछ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बिना पार्किंग के संचालित हो रहे हैं, तथा कुछ लोगों ने पार्किंग के लिए जगह बहुत कम दी है। जो वाहन पार्किंग के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे ग्राहको को वाहन खड़े करने में बहुत परेशानी होती है। आखिर बिना पार्किंग के बैंक कैसे संचालित हो रहे हैं। ये तो नियमों का उल्लघंन हो रहा है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। कई बार दुर्घटना तक हो जाती है। सरकारी जमीन पर वाहन खड़े हो रहे हैं । जबकि जिस भवन मे बैंक संचालित होती है उसकी स्वयं की पार्किंग होना जरूरी है। मुलताई में संचालित सभी बैंकों की पार्किंग व्यवस्था की जांच होना चाहिए।
कुछ बेसमेंट बिना अनुमति के बने हैं। कुछ व्यावसायिक भवनों के नक्शे बिना पार्किंग दिए पास हुए हैं। कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर पक्का अतिक्रमण कर लिया है। जांच होना चाहिए।
रवि खवसे, मुलताई (मध्यप्रदेश)