अलीराजपुर। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की मध्य प्रदेश की नोडल एजेंसी लघु उद्योग निगम द्वारा आई टी आई कॉलेज ऑडिटोरियम जिला अलीराजपुर में लघु उद्योग भारती के सहयोग से उद्योगों के विस्तार एवं कार्य पद्धति में सुधार के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र के महाप्रबंधक एस एल सोलंकी द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय स्तर पर उद्योगों की कार्यप्रणाली में सुधार एवं विस्तार के लिए RAMP नाम से कार्यशाला का आयोजन संपूर्ण भारतवर्ष में किया गया। जिसके अंतर्गत मध्य प्रदेश के सभी जिलों में LEAN मैनेजमेंट, ZED सर्टिफिकेशन एवं IPR जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ आदित्य शर्मा द्वारा जानकारी प्रदान की गई व लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राजेश मिश्रा द्वारा लघु उद्योग भारती के कार्य का विवरण दिया गया।

उक्त कार्यशाला लघु उद्योग भारती प्रदेश अध्यक्ष राजेश मिश्रा, लघु उद्योग भारती मालवा संयुक्त सचिव सीमा मिश्रा, जिला अग्रणी प्रबंधक राजेश हंसवानी, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक एस एल सोलंकी, एमएसएमई पॉलिसी मास्टर ट्रेनर नवीन शुक्ला, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के ZED (जीरो डिफेक्ट एवं जीरो इफेक्ट) ट्रेनर राजेश सरवटे, म. प्र. लघु उद्योग निगम के ई वाय कंसल्टेंट आदित्य शर्मा एवं जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के प्रबंधक रोहित भिंडे एवं सहायक प्रबंधक रितेश मंडलोई भी उपस्थित रहे। उक्त कार्यशाला में बताया कि विकसित भारत में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका है एवं इस भूमिका को पूरा करने के लिए उद्योगों को अपना विस्तार एवं उसकी कार्य प्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता है। जिससे कि वह अपनी कार्य क्षमता एवं उत्पाद की गुणवत्ता को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मापदंड पर पहुँचा सकते हैं। लघु उद्योग भारती जो की एक राष्ट्रीय स्तर का संगठन है उसके सहयोग से यह कार्यशाला में आयोजित की गई जिसमें लगभग 100 उद्यमियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का संचालन लघु उद्योग भारती की संयुक्त सचिव सीमा मिश्रा द्वारा किया गया व आभार जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के प्रबंधक रोहित भिंडे ने माना।
1) एमएसएमई प्रोत्साहन योजना,
2) एमएसएमई को औद्योगिक भूमि तथा भवन आवंटन एवं प्रबंधन नियम 2025,
3) एमएसएमई विकास नीति 2025,
4) मध्य प्रदेश स्टार्टअप पॉलिसी एवं कार्यान्वयन योजना,
5) का विषय विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से अवगत कराया गया।
एमएसएमई को दी जाने वाली सुविधाए एवं सहायताएं –
1. उद्योग विकास अनुदान (यंत्र-संयंत्र में 10 करोड़ रूपर्यं तक का निवेश करने वाली इकाई हेतु) नई औद्योगिक इकाई को किये गए पात्र निवेश का 40% उद्योग विकास अनुदान, 4 समान वार्षिक किश्तों में ।
2. महिला/अजा/अजजा उद्यमी द्वारा स्थापित इकाई के लिये 8% अतिरिक्त अनुदान
3. अजा/अजजा वर्ग की महिला उद्यमी द्वारा स्थापित इकाई के लिये 10% अतिरिक्त अनुदान
4. कुल वार्षिक विक्रय का 25-50% तक निर्यात करने के लिए 2% एवं 50% से अधिक निर्यात करने के लिए 3% अतिरिक्त अनुदान
5. रियायत की गणना के प्रयोजन के लिए भवन की लागत, संयंत्र और मशीनरी की लागत के 100% (फार्मा इकाईयो हेतु 200%) तक सीमित
एमएसएमई में गुणवत्ता प्रमाणीकरण एवं पेटेंट पर दी जाने वाली सुविधा –
1.पेटेंट कराने हेतु किये गये व्यय का 100% अधिकतम 10 लाख रुपये/पेटेंट, इकाई का मुख्यालय म.प्र. में होना अनिवार्य
2. निर्यात करने हेतु प्रमाणन मे हुए व्यय का 50% अधिकतम 50 लाख रु.। फार्मा इकाईयो को WHO-GMP/USFDA या अन्य के लिये किए गए व्यय का 50% अधिकतम रु. 100 लाख
3. ZED हेतु सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयो के लिए कुल लागत का क्रमशः 10% 20% व 25% : Lean हेतु भारत सरकार से सहायता लेने पर 5% अन्यथा 50% अधिकतम 15 लाख
4. आईएसओ / बीआयएस/बीईई/ आईएसआई/एफपीओ/ एगमार्क प्रमाणीकरण हेतु किए गए व्यय का 100% अधिकतम 20 लाख रुपये
एमएसएमई की निजी औद्योगिक क्षेत्र/क्लस्टर या बहमंजिला औद्योगिक परिसर की स्थापना विकास हेत सहायता-
1. 2-4 हेक्टेयर के औ. क्षे. क्लस्टर को स्थापना व्यय का 50 प्रतिशत और 4 हेक्टेयर से अधिक के औ. क्षे. क्लस्टर को स्थापना व्यय का 40 प्रतिशतः सहायता की अधिकतम सीमा रु. 50 लाख हेक्टेयर; अधिकतम 40 करोड
2. विकसित औद्योगिक क्षेत्र क्लस्टर का क्षेत्रफल कम से कम 2 हेक्टेयर आवश्यक
3. बहमंजिला औद्योगिक परिसर का कारपेट क्षेत्र कम से कम 1000 वर्गमीटर आवश्यक
4. बहमजिला औद्योगिक परिसर की स्थापना व्यय का 50 प्रतिशतः अधिकतम सीमा रु. 8000 वर्ग मीटर: अधिकतम रु. 40 करोड़
5. स्थापना विकास की पूर्व अनुमति उद्योग आयुक्त से प्राप्त करना आवश्यक (क्लस्टर को छोड़कर)
6. फूटवियर, फर्नीचर, टॉय, पॉंवरलूम, फार्मास्यूटिकल और परिधान क्षेत्र की इकाइयों के
लिये समर्पित निजी औदयोग़िक क्षेत्रों/बहुमंजिला औदयोगिक परिसर की स्थापना/ विकास
मे व्यय हुई राशि का 60 प्रतिशत

