इंदौर। भारत का लोकतंत्र तभी सशक्त और जीवंत माना जाएगा जब समाज के अंतिम छोर पर खड़े समुदाय की आवाज संसद और विधानसभाओं तक पहुंचेगी। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए आगामी अक्टूबर में मध्यप्रदेश में जयस युवा छात्र संसद 2025 आयोजित की जाएगी। यह दो दिवसीय आयोजन आदिवासी युवाओं को अपनी सोच, चिंतन और दृष्टिकोण को सामने रखने का अवसर प्रदान करेगा।
आयोजन की विशेषताओं में प्रत्येक प्रतिभागी को 5 से 7 मिनट का समय दिया जाएगा। इसमें केवल पंजीकृत युवा ही भाग ले सकेंगे, जिन्हें 15 दिन पूर्व पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। प्रतिभागियों का मूल्यांकन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और अनुभवी सामाजिक-राजनीतिक नेताओं की ज्यूरी करेगी। विजेताओं का चयन 5 पुरुष और 5 महिला प्रतिभागियों में से किया जाएगा। जिन्हें विशेष रूप से सम्मानित भी किया जाएगा।

भाषण के मुख्य विषयों में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार, आदिवासी दर्शन और चिंतन, धर्मांतरण और समाज पर उसका प्रभाव, आदिवासी धर्म-कोड की मांग, स्वतंत्र भारत में आदिवासियों का योगदान, आजादी के संघर्ष में आदिवासी क्रांतिकारियों की भूमिका, विकसित भारत के लिए आदिवासी समाज के विकास के उपाय, संविधान सभा में आदिवासी नेतृत्व का योगदान, ग्रामसभा और पंचायतों की मजबूती जैसे मुद्दे शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त कॉरपोरेट मीडिया, नक्सलवाद और माओवादी विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
जयस के राष्ट्रीय संरक्षक और विधायक डॉ. हीरालाल अलावा का कहना है कि यह आयोजन केवल दर्शन नहीं, बल्कि संघर्ष और नेतृत्व का भागीदार बनने का मंच होगा। युवा पीढ़ी को आदिवासी अस्मिता, संवैधानिक अधिकार और समाज की चुनौतियों पर खुलकर बोलना होगा। यही नेतृत्व आदिवासी समाज और राष्ट्रहित की दिशा तय करेगा। जयस युवा छात्र संसद 2025 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की चेतना, आत्मसम्मान और नई दिशा का प्रतीक बनेगी। इससे निकला संदेश न केवल आदिवासी समाज, बल्कि पूरे भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने को मजबूती प्रदान करेगा।


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Very good