अलीराजपुर समाचार. कलेक्टर डॉ. अभय अरविंद बेडेकर की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा अभियान एवं महिला बाल विकास विभाग अंतर्गत जिले के स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों की मरम्मत, निर्माण एवं जीर्ण-शीर्ण भवनों की स्थिति की समीक्षा हेतु बैठक का आयोजन कलेक्टर सभा कक्ष में किया गया।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह, अनुविभागीय अधिकारी अर्थ जैन, प्रभारी अपर कलेक्टर विरेन्द्र सिंह बघेल, संयुक्त कलेक्टर प्रियांशी भंवर, डिप्टी कलेक्टर निधि मिश्रा सहित समस्त बीआरसी, सीडीपीओ एवं संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में बताया गया कि जिले में 257 स्कूल भवन जीर्ण-शीर्ण या अनुपयोगी स्थिति में हैं, जिनके विरुद्ध पूर्व में ही ध्वस्तीकरण की कार्यवाही के निर्देश दिए जा चुके हैं। वहीं, 640 स्कूल भवन मरम्मत योग्य चिन्हित किए गए हैं, जिनकी शीघ्र स्वीकृति के लिए वरिष्ठ कार्यालय को पत्र लिखा जाएगा। 40 भवनहीन स्कूलों हेतु नवीन भवनों का प्रस्ताव प्रचलन में है और 97 मरम्मत कार्य स्वीकृत होकर आगामी सत्र से पूर्व पूर्ण किए जाएंगे।
कलेक्टर बेडेकर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे विकासखंडवार भवनों की जानकारी एकत्रित कर भौतिक सत्यापन कराएं। उन्होंने कहा कि जिन भवनों की छतों से पानी टपकता है, उनकी मरम्मत अगले 7 दिनों के भीतर कराई जाए। यदि कोई जर्जर भवन अब भी संचालित अवस्था में पाया गया तो संबंधित प्राचार्य एवं इंजीनियर के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।
महिला एवं बाल विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि छूटे हुए नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों के प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र विभाग को भेजें और यह प्रमाणित करें कि उनके क्षेत्र में कोई मरम्मत या निर्माण कार्य लंबित नहीं है। भविष्य में यदि ऐसी जानकारी प्राप्त होती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।
नवीन भवनों की जानकारी प्रस्तुत न करने पर जोबट एवं सोण्डवा सीडीपीओ को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने सभी बीआरसी को निर्देशित किया कि आगामी 7 दिनों में नए सत्र के पूर्व सभी मरम्मत कार्य एवं शौचालय सुधार कार्य पूर्ण कराएं, अन्यथा संबंधित शाला प्रभारी सहित बीआरसी के विरुद्ध भी कार्यवाही की जाएगी।
कलेक्टर बेडेकर ने दोहराया कि बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तायुक्त शिक्षा वातावरण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी स्थिति में जर्जर भवनों में शैक्षणिक या बाल विकास गतिविधियाँ संचालित नहीं होनी चाहिए।

