बड़ी खट्टाली, अलीराजपुर। ग्राम खट्टाली और आसपास के ग्रामीण अंचलों के लोग इन दिनों एक गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। क्षेत्र में आधार सेवा केंद्र की अनुपलब्धता के कारण सैकड़ों ग्रामीणों को अपने दस्तावेजों का पंजीयन या अपडेट कराने के लिए 10 से 20 किलोमीटर दूर जोबट या जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ रहा है।
इस समस्या का सबसे अधिक प्रभाव छात्रों पर पड़ रहा है। वर्तमान में प्रवेश प्रक्रिया चालू है, लेकिन नवीन छात्रों के आधार कार्ड न बनने और पुराने आधार में नाम, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर सुधार जैसी जरूरी अपडेट न हो पाने के कारण उनका प्रवेश और प्रोफाइल निर्माण अटक गया है। इससे छात्रवृत्ति, छात्रावास, समग्र आईडी, जाति प्रमाण पत्र जैसी सुविधाओं में बाधा उत्पन्न हो रही है।
ग्रामीणों की मांग है कि खट्टाली जो 15 से 16 गांवों का केंद्र बिंदु है। वहां स्थायी आधार सेवा केंद्र खोला जाए। इससे आधार से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा और पीएम किसान, आयुष्मान भारत, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और आवास योजना जैसी सरकारी सेवाओं का लाभ भी ग्रामीणों तक सरलता से पहुंच पाएगा।
धरती आबा शिविर में भी नहीं हुआ समाधान – पिछले दिनों खट्टाली में आयोजित धरती आबा शिविर में आधार सेवा के लिए एक स्टॉल लगाया गया था। लेकिन उस दिन भी किसी भी व्यक्ति का आधार से संबंधित कोई कार्य नहीं हो सका। ग्रामीण दिनभर कतार में इंतजार करते रहे पर तकनीकी या संसाधन संबंधी समस्याओं के चलते न तो नया पंजीकरण हो पाया, न ही किसी का अपडेट या सुधार। इससे लोगों में निराशा और आक्रोश दोनों देखा गया।
समस्या केवल दूरी की नहीं, बल्कि व्यवस्था की है – यह केवल स्थायी आधार केंद्र की कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था का भी संकेत है। जब अस्थायी शिविरों में भी काम न हो पाए तो इसका सीधा प्रभाव ग्रामीणों के शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक अधिकारों पर पड़ता है।
बारिश के व्यस्त कृषि मौसम में किसानों को खेती छोड़कर बार-बार शहरों की ओर जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की हानि होती है। आधार सेवा केंद्रों में भीड़ इतनी होती है कि पूरा दिन इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आता।
बैंकिंग सेवाएं भी चरमराई – खट्टाली में मौजूद एकमात्र ग्रामीण बैंक भी सीमित लेन-देन ही कर पाता है। कई बार नकद की अनुपलब्धता के कारण खाताधारकों को निराश लौटना पड़ता है।
ग्रामीणों की मांग है कि खट्टाली में एक स्थायी आधार सेवा केंद्र की स्थापना की जाए। शिविरों में भेजे जाने वाले आधार ऑपरेटरों को सभी तकनीकी संसाधनों से युक्त किया जाए। इस विषय को केवल कागजी खानापूर्ति न मानकर, स्थानीय जनजीवन की वास्तविक आवश्यकताओं के रूप में लिया जाए।

