अलीराजपुर। खेती में पारंपरिक पद्धति से सिंचाई करने पर खेतों में मिट्टी के कटाव और अत्यधिक पानी के उपयोग जैसी समस्याएँ सामने आती थीं, जिससे खरपतवार की भी अधिकता होती थी। यह जानकारी ग्राम कंदा, तहसील जोबट के कृषक सुंदर सिंह सेमलिया ने दी। सेमलिया ने बताया कि वे पहले पारंपरिक तरीके से खेती करते थे। आधुनिक कृषि तकनीकों से जल संरक्षण कर अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु उन्होंने कृषि विभाग जोबट से संपर्क कर जानकारी प्राप्त की। इसके बाद जिला स्तर पर भी सलाह ली, जहाँ उन्हें उत्तम बीज चयन, खाद और दवाइयों के सही उपयोग संबंधी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
ड्रिप सिंचाई योजना के तहत विभाग द्वारा उन्हें ड्रिप लाइन उपलब्ध कराई गई। एक हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिस्टम के उपयोग से उन्होंने कम पानी में अधिक फसल उत्पादन प्राप्त किया। साथ ही खरपतवार नियंत्रण हेतु लगने वाली दवाइयों की खपत में भी कमी आई। ड्रिप सिंचाई से मिट्टी के कटाव की समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई।
इस योजना के तहत उन्हें शासन से 55 हजार रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ। उन्होंने जिले के समस्त कृषकों से आह्वान किया कि वे असिंचित या कम जल स्तर वाली भूमि में भी ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाकर बेहतर उत्पादन लें। इस अवसर पर उन्होंने मध्यप्रदेश शासन एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।

