अलीराजपुर। जोबट तहसील के श्री चारभुजा खट्टाली धाम में गुड़ी पड़वा नववर्ष का पर्व धूमधाम से मनाया गया। प्रातः से ही मंदिर में भक्तों का ताता लगा रहा। वही शाम को आस पास के नगरों के श्रद्धालु ने आरती में शामिल होकर धर्म लाभ लिया। एक दूसरे को बधाई दी व वरिष्ठ जनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। पुष्प वर्षा कर सम्मान किया। मंदिर प्रांगण में गणगौर पर्व के गीत, नृत्य, गरबा कर माताजी की आराधना भी की। भगवान चारभुजा नाथ का आशीर्वाद भी लिया। जोबट पुनेय परिवार की ओर से आरती और प्रसादी का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में नगर ओर बहार से पधारे श्रद्धालु ने धर्म लाभ लिया।
Gudi Padwa 2025: गुड़ी पड़वा उत्सव हिंदू नववर्ष के आरंभ की खुशी में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा का उत्सव विशेष रूप से आकर्षक होता है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी इस पर्व को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
गुड़ी पड़वा एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो महाराष्ट्र, गोवा, और कुछ अन्य भारतीय राज्यों में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पहली तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल में पड़ता है।
गुड़ी पड़वा का महत्व
गुड़ी पड़वा का महत्व कई कारणों से है:
1. नव वर्ष की शुरुआत: गुड़ी पड़वा महाराष्ट्रीयन नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
2. वसंत ऋतु का आगमन: यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है।
3. ब्रह्मा जी की पूजा: गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्मा जी की पूजा की जाती है, जो सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं।
4. शुभ और मंगलकारी: गुड़ी पड़वा का दिन शुभ और मंगलकारी माना जाता है, इसलिए इस दिन कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं।
गुड़ी पड़वा की विशेषताएं
गुड़ी पड़वा की कुछ विशेषताएं हैं:
1. गुड़ी का महत्व: गुड़ी पड़वा के दिन एक गुड़ी (एक प्रकार का ध्वज) लगाया जाता है, जो शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
2. पूजा-पाठ: गुड़ी पड़वा के दिन विशेष पूजा-पाठ किए जाते हैं।
3. विशेष भोजन: गुड़ी पड़वा के दिन विशेष भोजन बनाया जाता है, जिसमें पूरण पोली, श्रीखंड, और अन्य व्यंजन शामिल होते हैं।
4. उत्सव और समारोह: गुड़ी पड़वा के दिन उत्सव और समारोह आयोजित किए जाते हैं।
गुड़ी पड़वा का प्रचलन
गुड़ी पड़वा मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गोवा, और कुछ अन्य भारतीय राज्यों में मनाया जाता है।
गुड़ी पड़वा की मान्यताएं
गुड़ी पड़वा की कुछ मान्यताएं हैं:
1. शुभ और मंगलकारी: गुड़ी पड़वा का दिन शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
2. नव वर्ष की शुरुआत: गुड़ी पड़वा महाराष्ट्रीयन नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
3. वसंत ऋतु का आगमन: यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है।
4. ब्रह्मा जी की पूजा: गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्मा जी की पूजा की जाती है, जो सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं।

